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शीला दीक्षितजी एक तरफ आप दिल्ली जल बोर्ड गैंगरेप के आरोपियों को बचा रही हैं और दूसरी तरफ गैंगरेप के विरोध में शांति मार्च निकाल रही हैं. यह तो सरासर दिखावा है.

दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित आज दिल्ली में गैंगरेप के खिलाफ एक शांति मार्च निकाल रही हैं. प्रश्न उठता है कि क्या वाकई मुख्यमंत्री महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं या बस राजनीति कर रही हैं?

मुख्यमंत्री की मंशा पर संदेह इसलिए होता है क्योंकि इसी तरह का एक मामला दिल्ली जल बोर्ड में हुआ था जिसकी वह अध्यक्ष हैं. दुर्भाग्य की बात है कि 2006 में हुए उस दुष्कर्म के मामले में आज छह साल बाद भी दिल्ली पुलिस ने कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मामले के चारों अभियुक्त दिल्ली जल बोर्ड के बहुत वरिष्ठ अधिकारी हैं निलंबित करना या गिरफ्तार कराना तो दूर, शीला दीक्षितजी ने उनमें से एक को प्रोन्नति दे दी.

दिल्ली जल बोर्ड के एक ठेकेदार के यहां काम करने वाली एक लड़की ने 2006 में आरोप लगाया था कि दिल्ली जल बोर्ड के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने उसका सामूहिक बलात्कार किया और इस दुष्कर्म की एक सीडी बना ली. सीडी बनाने के बाद वे उस लड़की को ब्लैकमेल करने लगे. एक दिन जब वह लड़की दिल्ली जल बोर्ड के दफ्तर में अधिकारियों से वह सीडी वापस मांगने गई तो बोर्ड के चीफ इंजीनियर बी.एम.ढल ने अपने केबिन में उसके साथ छेड़छाड़ (molest) की और उसे जबरदस्ती वह सीडी भी दिखाई. बदनामी के डर से वह लड़की कुछ महीने के लिए खामोश हो गई. लेकिन जब ब्लैकमेलिंग बढ़ने लगी तो लड़की ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की. पुलिस ने एफआईआर लिखने से मना कर दिया क्योंकि इसमें जल बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे. लड़की ने शीला दीक्षित को कई बार पत्र लिखकर आपबीती बताई लेकिन उन्होंने कोई सहायता नहीं की. हारकर उस लड़की को अदालत जाना पड़ा. अदालत की दखल के बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई.

अगले तीन साल तक पुलिस अपने ढुलमुल तरीके से मामले की जांच करती रही और 2010 में पुलिस ने कोर्ट को यह कहते हुए मामला बंद करने की अर्जी दी कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं और उनका दोष साबित नहीं होता. अदालत ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए क्लोजर रिपोर्ट को मानने से इंकार कर दिया. कोर्ट का कहना था कि लड़की और अभियुक्त के बीच शारीरिक संबंध बना, यह बात साबित हो चुकी है. अगर लड़की यह कह रही है कि वह संबंध उसकी मर्जी के खिलाफ बनाया गया तो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक ये सभी तथ्य बलात्कार माने-जाने के लिए पर्याप्त हैं. कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए उन तीनों अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा चलाने के आदेश दिए. लेकिन बी.एम.ढल के खिलाफ कोर्ट ने कोई आदेश नहीं दिया. लड़की ने इसके बाद कोर्ट में अर्जी दी कि बी.एम.ढल के खिलाफ भी मुकदमा चलाया जाए. तीनों अभियुक्तों ने निचली कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है.

इस लड़की ने इस दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी, शीला दीक्षित से लेकर महिला आयोग तक, सबको पत्र लिखा और इंसाफ दिलाने की गुहार लगाई लेकिन उसे कहीं से मदद नहीं मिली. दिल्ली की मुख्यमंत्री ने तो हद ही कर दी. उन्होंने बी.एम.ढल को प्रमोशन देकर दिल्ली जल बोर्ड का सदस्य बना दिया. इस पर दिल्ली के उप-राज्यपाल महोदय ने आपत्ति भी की थी. उनका कहना था कि ढल पर गंभीर आरोप लगे हैं और मामला अदालत में विचाराधीन है इसलिए जब तक ढल कोर्ट से निर्दोष साबित नहीं होते, उन्हें प्रोन्नति न दी जाए. लेकिन शीला दीक्षित ने उप-राज्यपाल की दलील को दरकिनार करते हुए बी.एम.ढल को प्रोन्नति दे दी.

इस मामले में अभियुक्तों को न तो निलंबित किया गया और न ही उनकी गिरफ्तारी ही हुई. छह साल बीत चुके हैं लेकिन पुलिस ने चार्जशीट तक दायर नहीं की है. चूंकि इस मामले में दिल्ली जल बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं इसलिए पुलिस उनकी हरसंभव मदद करने की कोशिश कर रही है. 2007 से 2010 के बीच जब मामले की जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी कई बार सुनवाई के दौरान कोर्ट नहीं पहुंचे, तो कोर्ट को हारकर उन अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी करने पड़े. दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष भीष्म शर्मा ने इस बात का विरोध करते हुए इस्तीफा तक दे दिया लेकिन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कानों में जूं तक नहीं रेंगी. 2007 में विधायक विजय जौली ने अभियुक्तों को निलंबित करने की मांग की थी लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई.

इस पीड़िता ने दो दिन पहले अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिखा. उस पत्र में उसने अपना दर्द और अब तक सारी कार्रवाइयों का सिलसिलेवार ब्योरा देते हुए सभी दस्तावेज भेजे.

आज शीला दीक्षितजी दिल्ली में महिला सुरक्षा सम्मान मार्च निकाल रही हैं. इसलिए जनता उनसे कुछ प्रश्न पूछना चाहती है:

1.      दिल्ली जल बोर्ड के उन तीनों अधिकारियों को आज तक निलंबित क्यों नहीं किया गया?

2.      उप-राज्यपाल की आपत्ति के बावजूद बी.एम.ढल को प्रोन्नति देकर दिल्ली जल बोर्ड का सदस्य क्यों बना दिया गया?

3.      सभी अभियुक्तों को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है?

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